बरसों पहले चंद पंक्तियाँ कही पढ़ी थी ... उस वक़्त इतनी छोटी थी कि इन पंक्तियों का अर्थ नहीं समझ पाई थी .. किन्तु फिर भी पंक्तियाँ इतनी अच्छी लगी थी कि सीधे मन में कहीं गहरे तक पैठ गयी थी .. आज यू ही ये पंक्तियाँ याद आ गयी तो सोचा आप सभी को भी पढवा दूँ .हालाँकि मुझे ये पता नहीं है कि ये किन्होने लिखी है .. शायद अम्रता प्रीतम जी की हो .. आप में से किसी को पता हो तो जरूर बताये..
तेरे मेरे रिश्ते को मैंने रखा इतना उपर
अपनों से , परायों से ...
रिश्तों से ,नातों से ..
रीतों से रिवाजों से ...
रस्मों से ,कसमों से ...
सच से , झूठ से ...
वर्तमान से , भूत से ...
आशा से , निराशा से ...
सुख से , दुःख से
जीवन से , म्रत्यु से
हर चीज़ से इतना ऊपर
कि आज मेरा ही हाथ वहा तक नहीं पहुचता ...
51 टिप्पणियाँ:
hi..
Sundar Bhav...
Deepak
बहुत बढ़िया रचना है !
Rishto ko achchha byan kiya.......:)
वाह जी क्या बात है ...अपनी ही पहुँच से बाहर हो गई बात
पता नहीं किसकी है...शैली से तो अमृता प्रीतम की हो सकती है..मगर अच्छा लगा पढ़कर. आभार.
मालूम नहीं किस की लिखी कविता है,लेकिन बहुत ही अच्छी है.
बहुत खूब ... फांसला इतना की हाथ बड़ा कर छू भी न सको .... लाजवाब रचना है .....
रचना बहुत सुन्दर है ...
किसकी है ये पता नहीं
जिस ने लिखा है ,बहुत सुन्दर लिखा है।आभार
sunder....kam shabdo me badi rachna..!!!!!!!
बहुत अच्छे भाव हैं इस कविता के जो अनायास ही हृदय को उद्वेलित कर देते हैं और और इच्छा होती है कि बीते जीवन के हिसाब-किताब किया जाये...
आह! - बहुत खूब. रचनाकार को बधाई और पढ़वाने के लिए आपका धन्यवाद्
जिनके भी भाव हैं, सत्य को उजागर करते हैं।
जब व्यक्ति के भाव इन सभी
अवस्था से ऊपर उठ जातें हैं,
फिर हाथ पहुँचे या न पहुँचे
लेकिन छूने की इच्छा
समाप्त हो जाती है।
स्वाती जी, शुक्रिया!
jis kisee kee bhee rachana ho shukrguzar to hum aapke hai........... aapke madhym se hee padne ka avsar jo milaa .bahut gahre bhav liye bheetar tak utar ghar kar jane walee rachana........
aabhar
कविता किसकी है यह तो पता नहीं पर इसे पढवाने के लिए आप जरुर धन्यवाद की पात्र हैं.
bahut khoob .. thanks fr sharing
वाह....
दिल में उतरती चली गई हर पंक्ति...
अच्छी कविता पढ़वाने के लिए शुक्रिया।
बहुत खूब ....जीवन की फिलासफी है इसमें कुछ हद तक वास्तविकता भी...शुभकामनायें !
लाजवाब!!!!!!!!!बहुत बढ़िया रचना है
!!!!!!!!!!!
jisne bhi likhi bahut achchhi likhi lekin aap dwara hame padhvaane ke liye bahut shukriya....jaise hi pata chalega jarur batayenge
सुन्दर भावों से भरी हुयी........है आपकी रचना .
सिर पर चढाने का नतीजा.....
हा हा हा!
मज़ाक को एक तरफ रख दें तो खूबसूरत रचना!
amazing...swati..just beautiful!
..आज मेरा ही हाथ वहा तक नहीं पहुचता ...
..बहुत खूब. कुछ रिश्ते ऐसे होते हैं जो सीधे दिल में उतर जाते हैं. उन तक हाथ नहीं पहुंचता अर्थात अपना वश नहीं चलता.
अच्छी रचना है. आभार.
बहुत खूब ... ये रिश्ता भी अजीब होता है .......
हाँ सुन्दर भाव है
@रिश्तों से ,नातों से ..रीतों से रिवाजों से ...रस्मों से ,कसमों से ...सच से , झूठ से
हर कोमा के चिन्ह के साथ के साथ उंचाई बढती जा रही थी "रिश्ते की"
BAHUT HI SUNDAR RACHNA ...PREM AUR MITRATA KE GAHRE BHAAVO KO UJAAGAR KARTI HUI .. BADHAYI SWEEKAR KARIYE ..
VIJAY
आपसे निवेदन है की आप मेरी नयी कविता " मोरे सजनवा" जरुर पढ़े और अपनी अमूल्य राय देवे...
http://poemsofvijay.blogspot.com/2010/08/blog-post_21.html
awesome !
अति सुन्दर........।
Hi,I recently came across your blog and I have enjoyed reading.Nice blog. I thought I would share my views which may help others.I turned 41 and i have Erectile Dysfunction problem. After reading that INVIGO can cure ED,tried it. I have seen the difference. Its giving very good results and is a permanent solution. I will keep visiting this blog very often.we can reach INVIGO at WWW.invigo.in.
सुन्दर रचना।
यहाँ भी पधारें :-
No Right Click
samay ke saath arth samjh aata hai..
bahut achha aapke blog par aakar..
haardik shubhkamnayne
badhiya rachna
badhai
जिसकी भी है बहुत बहुत बढ़िया है ...रिश्ते की सही परिभाषा
behtreen bhavabhivyakti........sadhuwaad..
क्षमा कीजिये देर से पहुंचा हूँ...आपकी ये रचना कमाल की है...चंद लफ़्ज़ों में रिश्तों पर बहुत गहरी बात की है आपने...बधाई...
नीरज
लेखन के लिये “उम्र कैदी” की ओर से शुभकामनाएँ।
जीवन तो इंसान ही नहीं, बल्कि सभी जीव जीते हैं, लेकिन इस समाज में व्याप्त भ्रष्टाचार, मनमानी और भेदभावपूर्ण व्यवस्था के चलते कुछ लोगों के लिये मानव जीवन ही अभिशाप बन जाता है। अपना घर जेल से भी बुरी जगह बन जाता है। जिसके चलते अनेक लोग मजबूर होकर अपराधी भी बन जाते है। मैंने ऐसे लोगों को अपराधी बनते देखा है। मैंने अपराधी नहीं बनने का मार्ग चुना। मेरा निर्णय कितना सही या गलत था, ये तो पाठकों को तय करना है, लेकिन जो कुछ मैं पिछले तीन दशक से आज तक झेलता रहा हूँ, सह रहा हूँ और सहते रहने को विवश हूँ। उसके लिए कौन जिम्मेदार है? यह आप अर्थात समाज को तय करना है!
मैं यह जरूर जनता हूँ कि जब तक मुझ जैसे परिस्थितियों में फंसे समस्याग्रस्त लोगों को समाज के लोग अपने हाल पर छोडकर आगे बढते जायेंगे, समाज के हालात लगातार बिगडते ही जायेंगे। बल्कि हालात बिगडते जाने का यह भी एक बडा कारण है।
भगवान ना करे, लेकिन कल को आप या आपका कोई भी इस प्रकार के षडयन्त्र का कभी भी शिकार हो सकता है!
अत: यदि आपके पास केवल कुछ मिनट का समय हो तो कृपया मुझ "उम्र-कैदी" का निम्न ब्लॉग पढने का कष्ट करें हो सकता है कि आपके अनुभवों/विचारों से मुझे कोई दिशा मिल जाये या मेरा जीवन संघर्ष आपके या अन्य किसी के काम आ जाये! लेकिन मुझे दया या रहम या दिखावटी सहानुभूति की जरूरत नहीं है।
थोड़े से ज्ञान के आधार पर, यह ब्लॉग मैं खुद लिख रहा हूँ, इसे और अच्छा बनाने के लिए तथा अधिकतम पाठकों तक पहुँचाने के लिए तकनीकी जानकारी प्रदान करने वालों का आभारी रहूँगा।
http://umraquaidi.blogspot.com/
उक्त ब्लॉग पर आपकी एक सार्थक व मार्गदर्शक टिप्पणी की उम्मीद के साथ-आपका शुभचिन्तक
“उम्र कैदी”
बहुत अच्छा ब्लॉग लगा ........ और कविताओं के भाव भी सुंदर है.
जुलाई के बाद अभी तक कुछ नहीं लिखा.....
हमें लिखना नहीं आता फिर भी खाम्खावाह लिखते रहते हैं........ और आप तो बहुद बढिया लिखती हैं.. स्थगित मत कीजिए.
दीपावली के इस पावन पर्व पर आप सभी को सहृदय ढेर सारी शुभकामनाएं
nice aap agli post ke bare me soch ke mujhe batana jaroor, and wish u a happy diwali and happy new year
ati sundar rachana se aapne rubaru karaya hai, dhanyawaad!
sundar rachana se aapane rubaru karaaya hai, dhanyawaad!
मैं ऐसे कुछ ब्लॉगरों को जानता हूं जिन्होंने मशहूर हस्तियों की रचनाएं अपने नाम से छाप लीं। आपकी नेकनीयती को सलाम।
सारी उम्र का निवेश ज़रुरत के वक्त लुटा देखकर पत्थर हृदय भी भावुक होगा।
हुज़ूर...
इसे कहते हैं गुण-ग्राहकता...! आपको कुछ अच्छा लगा, तो उसे ग्रहण किया आपने... और दूसरों से शेयर भी किया...साधुवाद!
चिंतन को कुरेदने वाला तत्त्व है इस लघु रचना में...रचनाकार को बधाई!
जितनी तारीफ़ की जाय कम है ।
सिलसिला जारी रखें ।
जितनी तारीफ़ की जाय कम है ।
सिलसिला जारी रखें ।
आज पहली बार आपके ब्लॉग तक पहुंचा ...आपकी रचनात्मक प्रतिभा का कोई जबाब नहीं ....प्रभावित कर दिया आपने ...नयी पोस्ट का इन्तजार रहेगा ...धन्यवाद
आपको नव वर्ष 2011 की हार्दिक शुभकामनायें ...स्वीकार करें
जब भी आपके ब्लॉग पे आता हूँ हमेशा इन्ही पंक्तियों पे आके ठहर जाता हूँ ..
सागर में गागर ..समेटा हुआ है .
एक टिप्पणी भेजें