गुरुवार, 1 जुलाई 2010

कविता रूपी माला

कभी विचारों के प्रवाह में
बहते -बहते 
मिल जाते  हैं शब्द  रूपी मोती 
अनायास ही 
जिन्हें भावो- एहसासों रूपी धागे में पिरो कर 
बन जाती है कविता रूपी माला
सहज ही 






तो कभी  मिलते नहीं हैं शब्द 
खो जाते  हैं सारे एहसास और बिखर जाते हैं सब भाव यूं ही मन की भूमि पर 
चाहे करो प्रयास कितने ही....





40 टिप्‍पणियां:

राजेश उत्‍साही ने कहा…

सही कह रही हैं स्‍वाति जी। सुंदर।

ज्योत्स्ना पाण्डेय ने कहा…

भावों के धागे में जब शब्द रूपी मोती पिरोये जायेंगे तो निश्चित ही सुन्दर कविता का जन्म होगा...

सुन्दर!


शुभकामनाएं....

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

बहुत बार होता है बिलकुल ऐसा ही...सटीक अभिव्यक्ति

शारदा अरोरा ने कहा…

आपने सुन्दर लिखा है . बिखरे हुए अहसास भी तो कितना कुछ पकड़ लाते हैं ...

राज भाटिय़ा ने कहा…

बहुत सुंदर

seema gupta ने कहा…

behd khubsurat ehsaas..

regards

Gourav Agrawal ने कहा…

बहुत अच्छी कविता है , थोड़ी मेरी रचना भी पढिएगा..... अभी बनाई है

मोती है अच्छे
सुन्दर है मोती
रचना के मामले में
असली मोल है धागे का
जिनसे माला तैयार होती
कहें उसे भावना
या कहें एहसास
शब्दों की कमी अक्सर
किसके पास है होती
इसीलिए तो
असली मोल है धागे का
जिनसे माला तैयार होती

राकेश कौशिक ने कहा…

बिलकुल सही - तार्तिक प्रस्तुति.

आशीष/ ASHISH ने कहा…

वक़्त-वक़्त की बात है!
मेरे साथ भी ऐसा ही होता है.....
अच्छे उदगार....
--------------------
इट्स टफ टू बी ए बैचलर!

राजकुमार सोनी ने कहा…

सुंदर रचना के लिए आपको बधाई।

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ ने कहा…

शब्दों को बहुत सलीके से गूँथा है आपने।
................
अपने ब्लॉग पर 8-10 विजि़टर्स हमेशा ऑनलाइन पाएँ।

Harsh ने कहा…

bhaav ghehre hai.....

बेचैन आत्मा ने कहा…

sunder atii sunder.

Mukesh Kumar Sinha ने कहा…

shabd bara badmaash hai.......kabhi gale milta hai to ungliyan paper pe thirakne lagti hai.......aur ek kavita tayar blog pe post hone ke liye.......:D

aur kabhi kabhi........bahut dushmani nikalta hai........mahino beet jaate hain, kuchh soch ya samajh nahi paate.......:(
hai na........

ek achchhi rachna.......

sada ने कहा…

सुन्‍दर शब्‍दों के साथ भावपूर्ण प्रस्‍तुति ।

sada ने कहा…

मेरे ब्‍लाग पर आपके आने का बहुत-बहुत आभार ।

रंजना [रंजू भाटिया] ने कहा…

बहुत सुन्दर रचना लिखी है आपने ..सही कहा पसंद आई बहुत शुक्रिया

शरद कोकास ने कहा…

चित्र सुन्दर है ।

अनामिका की सदाये...... ने कहा…

सच में ऐसा ही होता है कभी कभी.

Divya ने कहा…

sundar abhivyakti !

दिगम्बर नासवा ने कहा…

विचारों को शब्द मिलने से ही तो रचना का निर्माण होता है ...

singhsdm ने कहा…

सही कहा अपने कभी शब्द गम हो जाते हैं तो कभी शब्द अनायास मिल जाते हैं......शायद यही कविता है.

अमरेन्द्र नाथ त्रिपाठी ने कहा…

रचना-प्रक्रिया की बेचैनी को व्यक्त करती रचना ! सुन्दर ! मेरे ब्लॉग पर पधारने का शुक्रिया !

JHAROKHA ने कहा…

bilkul sahi kaha swati jiaapne shabdon ki moti milti hai to ban jaati hai kavita rupi mala.
pal bhar me jo kho jaate shabd
suna suna hojata man jaise
khali makan ko khola.
poonam

रचना दीक्षित ने कहा…

स्वाति जी मेरे ब्लॉग पर आने के लिए आभार. सच कभी बिखर जाये ये अहसास तो ऐसा ही होता है बेहतरीन प्रस्तुती

Deepak Shukla ने कहा…

hi...

sundar kavita...aaj kafi samay pashchat aapke blog par aaya...
sundar likhti hain aap..

Deepak..

aaj se main bhi aapka follower hua...

Vinay Prajapati 'Nazar' ने कहा…

बहुत सुन्दर कल्पना और कृति

mridula pradhan ने कहा…

bahot achche.

डा. अरुणा कपूर. ने कहा…

कभी बिखरे मोति माला बन जाते है...तो कभी माला से अलग हो कर, एक एक मोति अपना अस्तित्व जताता है....अति सुंदर भाव!

Parul ने कहा…

wah..shbdon ka sundar tana-bana!

Science Bloggers Association ने कहा…

बहुत सुंदर है यह माला।
................
नाग बाबा का कारनामा।
महिला खिलाड़ियों का ही क्यों होता है लिंग परीक्षण?

महफूज़ अली ने कहा…

अभिव्यक्ति बहुत सुंदर लगी...

शोभना चौरे ने कहा…

aksar aisa hi hota hai .bahut achhi abhivykti

विनोद कुमार पांडेय ने कहा…

बिल्कुल सही कहा आपने कविता तो मन के भाव है..

Razi Shahab ने कहा…

behtareen

नीरज जाट जी ने कहा…

बहुत खूब।

neelima garg ने कहा…

sundar poem...came to ur blog first time...

neelima garg ने कहा…

sundar poem...came to ur blog first time...

राकेश कौशिक ने कहा…

छोटे उस्ताद और उनकी सोच - - क्या बात है

राजेश चड्ढ़ा ने कहा…

आपके सभी प्रयास सार्थक हों...शुभकामनाएं