मंगलवार, 8 जुलाई 2014

डरती हूं मैं --------------






Mjrh gwa eSa 
dYiukvksa ds xxu esa mM+us ls
D;ksafd vDlj mM+rs mM+rs eSa cgqr mapkbZ ij pyh tkrh gwa
Hkfo"; ds lq[k&lkxj esa [kks lh tkrh gwa
ij lkjh dYiuk,a VwV dj fc[kj tkrh gSA
vkSj eSa ;FkkFkZ /kjkry ij vk fxjrh gwa
rc lksprh gwa]fd vkf[kj D;ksa dh Fkh eSaus dYiuk-----


Mjrh gwa eSa 
liuksa ds lalkj esa tkus ls
D;ksafd ftrus Hkh vPNs ns[ks gS  lius
os dHkh Hkh gq, uk gS vius
gj vPNk liuk VwV tkrk gS
D;ksa eSaus mUgsa vka[kksa esa latks;k];gh [;ky vkrk gSA 


Mjrh gwa eSa 
fdlh ckr  ij xoZ djus ls
D;ksafd ftl ckr ij Hkh eSaus fd;k gS xoZ
gks tkrk gS pwj&pwj esjk niZ
jg tkrh gwa lksp dj grizHk
vkf[kj D;ksa fd;k Fkk eSaus xoZ---


Mjrh gwa eSa 
fdlh ckr ij [kq'kh eukus ls 
D;ksafd tc Hkh eSa cgqr [kq'k gks tkrh gwa
vkuan ds fgaMksys esa झूyus yxrh gwa
vpkud mldh Mksj VwV tkrh gS
vkSj [kq'kh eqls nwj fNVd tkrh gSA
rc lksprh gwa fd vkf[kj D;ksa eukbZ Fkh bruh [kq'kh \


------------------

6 टिप्‍पणियां:

Prasanna Badan Chaturvedi ने कहा…

उम्दा और बेहतरीन ...आपको बहुत बहुत बधाई...
नयी पोस्ट@मुकेश के जन्मदिन पर.

BLOGPRAHARI ने कहा…

आपका ब्लॉग देखकर अच्छा लगा. अंतरजाल पर हिंदी समृधि के लिए किया जा रहा आपका प्रयास सराहनीय है. कृपया अपने ब्लॉग को “ब्लॉगप्रहरी:एग्रीगेटर व हिंदी सोशल नेटवर्क” से जोड़ कर अधिक से अधिक पाठकों तक पहुचाएं. ब्लॉगप्रहरी भारत का सबसे आधुनिक और सम्पूर्ण ब्लॉग मंच है. ब्लॉगप्रहरी ब्लॉग डायरेक्टरी, माइक्रो ब्लॉग, सोशल नेटवर्क, ब्लॉग रैंकिंग, एग्रीगेटर और ब्लॉग से आमदनी की सुविधाओं के साथ एक
सम्पूर्ण मंच प्रदान करता है.
अपने ब्लॉग को ब्लॉगप्रहरी से जोड़ने के लिए, यहाँ क्लिक करें http://www.blogprahari.com/add-your-blog अथवा पंजीयन करें http://www.blogprahari.com/signup .
अतार्जाल पर हिंदी को समृद्ध और सशक्त बनाने की हमारी प्रतिबद्धता आपके सहयोग के बिना पूरी नहीं हो सकती.
मोडरेटर
ब्लॉगप्रहरी नेटवर्क

कविता रावत ने कहा…
इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.
कविता रावत ने कहा…


डरती हूं मैं
किसी बात पर गर्व करने से
क्योंकि जिस बात पर भी मैंने किया है गर्व
हो जाता है चूर-चूर मेरा दर्प
रह जाती हूं सोच कर हतप्रभ
आखिर क्यों किया था मैंने गर्व...

डरती हूं मैं
किसी बात पर खुशी मनाने से
क्योंकि जब भी मैं बहुत खुश हो जाती हूं
आनंद के हिंडोले में झूलने लगती हूं
अचानक उसकी डोर टूट जाती है
और खुशी मुझसे दूर छिटक जाती है।
तब सोचती हूं कि आखिर क्यों मनाई थी इतनी खुशी ?
..........
सच जब अपने हिस्से में खुशियां बहुत कम होती हैं तो कभी अचानक मिली बहुत ख़ुशी से भी मन डरता है
बहुत सुन्दर रचना

स्वाति ने कहा…

अाप सभी का धन्‍यवाद।

Aparna Sah ने कहा…

sarthak or sundar rachna....