सोमवार, 31 मई 2010

नाम ये कुछ गुम सा गया है..


बहुत दिनों से मन में गाना गूंज रहा था .... नाम गुम जाएगा ,चेहरा ये बदल जाएगा ,मेरी आवाज़ ही मेरी पहचान है ------- इस गाने के शब्दों ने गूंजते गूंजते एक छोटी सी नज़्म की रचना कर दी ..
नाम ये कुछ गुम सा गया है ,
चेहरा भी ये बदल सा गया है ,
ना ही मेरी आवाज़ मेरी पहचान है ,
बोलो फिर मुझे कैसे ढून्ढ पाओगे ?
सिर्फ एक भीड़ का हिस्सा बना हुआ पाओगे .. 

18 टिप्‍पणियां:

रंजना [रंजू भाटिया] ने कहा…

सही कहा भीड़ का हिस्सा ही बन जाते हैं बाद में .सुन्दर लिखा है शुक्रिया

राज भाटिय़ा ने कहा…

बहुत सुंदर धन्यवाद

दिगम्बर नासवा ने कहा…

भीड़ में गुम जाना ही तो नियति है इंसान की ...

Hari Shanker Rarhi ने कहा…

Yeh ek vastvik such hai.bahut achchha.

अरुणेश मिश्र ने कहा…

अति सुन्दर स्वाँति जी ।

निर्झर'नीर ने कहा…

kam shabdon mein zindgi ka sar hai ye panktiyan ..really nice

डा. हरदीप सँधू ने कहा…

Mete na naam yeh mera
kaam main karoon koee essa
bheed main bhee tum
mujhe pahchane jaoge....

Yeh kaam aap pahle se hee kar rahee hain....jo aap ko bheed main pahchan ke layak bnaa dega.
Aap kee alag pahchaan hai ji.
hardeep

singhsdm ने कहा…

नाम ये कुछ गुम सा गया है ,
चेहरा भी ये बदल सा गया है ,
ना ही मेरी आवाज़ मेरी पहचान है ,
बोलो फिर मुझे कैसे ढून्ढ पाओगे ?
सिर्फ एक भीड़ का हिस्सा बना हुआ पाओगे ..
गुलज़ार साहब की पंक्तियों का एक नया विस्तार दे डाला आपने ......अच्छा सफल प्रयास . हम पहली बार आपके ब्लॉग पर आये पर अब लग रहा है की आते रहना पड़ेगा.....! आपकी टिपण्णी के लिए शुक्रिया

ज्योति सिंह ने कहा…

khoobsurat bhi aur sahi bhi ,yakinan aesa hota hai.shukriyaan blog par aane ke liye .

अमिताभ श्रीवास्तव ने कहा…

esa hi hota he, hamare aaspaas hi kuchh goonjataa he yaa kisika ahsaas hotaa he jo shabdo me bandhane ko majboor kartaa he..aour jab shabd bandh jaate he to rachna ka udgam ho jataa he.., haalanki geet se kuchh alag aapke shabd nahi he kintu fir bhi sundar he, soch me dhale hue../

Amitraghat ने कहा…

"सुन्दर लिखा है ...पर यदि हम अन्दर की ओर मुड़ जाए तो कभी-भी नहीं गुम होंगे..."

Gourav Agrawal ने कहा…

बहुत अच्छी पोस्ट है
सोचने पर मजबूर कर दिया....

आपके प्रश्न का संभावित उत्तर

माना नाम गुम जायेगा
चेहरा भी बदल जायेगा
क्या हुआ अगर आवाज भी नहीं पहचान है
क्योंकि सच्ची बात तो ईमान है
बाकी सब बदलता है या बेजान है
अपनी विचारों की जो खान है
बस वही हमारी असली पहचान है

हिमांशु । Himanshu ने कहा…

आपकी टिप्पणी के माध्यम से पहली बार पहुँचा आपके ब्लॉग तक !
बहुत दिनों तक अनजान रहना खल गया ! आता रहूँगा !

vicharmanch ने कहा…

वाह . वाह
मेरी शुभकामनाएं स्वीकार करें

'उदय' ने कहा…

...बहुत सुन्दर !!!

माधव ने कहा…

बहुत ही अच्छी रचना.

आशीष/ ASHISH ने कहा…

Simple.....
Aapki lekhnee se!!!!!!
Achha hai.....

pawan dhiman ने कहा…

भीड़ का हिस्सा बना हुआ पाओगे .. बहुत सुंदर